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नेपाल के गढ़ीमाई मेले के लिए उमड़ी आस्था, भारत -नेपाल बॉर्डर पर श्रद्धालुओं का सैलाब

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आयुष त्रिपाठी/रक्सौल, बिहार: बिहार के रक्सौल और नेपाल के बीरगंज बॉर्डर पर इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। नेपाल के बारापुर जिले में स्थित गढ़ीमाई मंदिर में चल रहे ऐतिहासिक मेले के लिए लोग बड़ी संख्या में सीमा पार कर रहे हैं। गढ़ीमाई मेला, जो हर पांच साल में आयोजित होता है, श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

सीमा पर दिखा आस्था का उत्साह

रक्सौल-बीरगंज बॉर्डर पर दिन-रात भक्तों का आवागमन जारी है। कई श्रद्धालु निजी वाहनों और पैदल नेपाल पहुंच रहे हैं। सीमा पर बढ़ी भीड़ के कारण सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर हैं।

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गढ़ीमाई मेले की खासियत

गढ़ीमाई मेला 2 दिसंबर 2024 से शुरू हो चुका है और लाखों भक्त देवी गढ़ीमाई के दर्शन और पूजा के लिए जुट रहे हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अनुष्ठान करते हैं। हालांकि, पशु बलि पर विवाद के बावजूद परंपरा के अनुसार कुछ लोग बलि चढ़ाते हैं, जबकि कई अब नारियल और मिठाई चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।

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स्थानीय व्यवसायों को मिला फायदा

इस मेले से सीमा क्षेत्र के होटलों, रेस्तरां और दुकानों को भी लाभ हो रहा है। रक्सौल और बीरगंज में होटल पूरी तरह बुक हो चुके हैं, और स्थानीय बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है बल्कि भारत-नेपाल की सांस्कृतिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का भी अद्भुत उदाहरण है।

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Ayush Tripathi

आयुष त्रिपाठी दून खबर में जूनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। डिजिटल पत्रकारिता में लगभग एक वर्ष का अनुभव रखने वाले आयुष वर्तमान में दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रहने वाले आयुष की रुचि राजनीतिक इंफोटेनमेंट खबरों के साथ-साथ व्यवसाय और उद्योग से जुड़ी खबरों में भी है।

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